रोहित शर्मा की 138 रन की पारी ने बदली तस्वीर, 2027 वर्ल्ड कप की रेस फिर हुई दिलचस्प

नई दिल्ली
वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की ODI सीरीज के लिए जब टीम इंडिया का ऐलान हुआ, तो रोहित शर्मा का नाम फिर स्क्वॉड में था. उनके साथ यशस्वी जायसवाल और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे विकल्प भी मौजूद हैं. यानी यह चयन किसी एक खिलाड़ी के लिए रास्ता रोकने का फैसला नहीं, बल्कि 2027 की टीम को आकार देने की प्रक्रिया का हिस्सा है.

लेकिन इस कहानी का असली ट्विस्ट स्क्वॉड में रोहित का नाम नहीं है. असली कहानी है कि दो महीने में रोहित शर्मा को लेकर सवाल से जवाब तक का सफर कैसे बदल गया.

कप्तानी गई, तो हर रन का हिसाब शुरू हुआ
शुभमन गिल को वनडे कप्तानी सौंपे जाने के बाद रोहित की भूमिका पूरी तरह बदल गई. अब टीम उनके इर्द-गिर्द नहीं बन रही थी. वह सिर्फ एक बल्लेबाज थे और बाकी खिलाड़ियों की तरह उनकी जगह भी प्रदर्शन से तय होनी थी.

यह बदलाव इसलिए भी बड़ा था क्योंकि रोहित अब भारत के लिए सिर्फ ODI क्रिकेट खेल रहे हैं. टेस्ट और T20 इंटरनेशनल से उनके संन्यास के बाद उनके पास फॉर्म साबित करने के मौके भी सीमित हैं. ऐसे में एक खराब सीरीज सिर्फ खराब सीरीज नहीं रहती, वह चयन की बहस का हिस्सा बन जाती है.

ऑस्ट्रेलिया में रोहित ने पहले 73 और फिर नाबाद 121 रन बनाकर दिखाया कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. लेकिन इसके बाद की 11 पारियों में उनके बल्ले से 57, 14, 75, 26, 24, 11, 16, 48, 79, 11 और 26 रन निकले.

इनमें 75 और 79 जैसी पारियां थीं, लेकिन वह एक बड़ी, निर्णायक पारी गायब थी जो बाकी सारी चर्चाओं पर भारी पड़ सके.

फिर इंग्लैंड सीरीज आई. बर्मिंघम में 11 रन और कार्डिफ में 47 गेंदों पर 26 रन. सवाल और तेज हो गए. क्या 2027 तक रोहित को लेकर सोचना भी चाहिए? क्या युवा ओपनरों को आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है?
138 रन ने बदल दिया सवाल
इंग्लैंड ने 387 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था. लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को ऐसी पारी की जरूरत थी जो मैच को वापस उसकी मुट्ठी में ला सके.

रोहित ने वही किया…
उन्होंने सिर्फ 110 गेंदों पर 138 रन ठोक दिए. 17 चौके और 5 छक्के. भारत मैच तो 27 रन से हार गया, लेकिन रोहित ने उस दिन एक अलग मैच जीत लिया- अपने भविष्य को लेकर चल रही बहस का.

यह पारी इसलिए महत्वपूर्ण नहीं थी कि रोहित ने एक और शतक पूरा कर लिया. इसकी अहमियत इसलिए थी क्योंकि यह पारी उस वक्त आई जब उनके भविष्य पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे थे.

एक 39 साल के बल्लेबाज ने दिखाया कि उम्र और हालिया फॉर्म के आंकड़ों के बावजूद उनके बल्ले में अभी भी ऐसी ODI पारी निकालने की क्षमता है जो मैच की दिशा बदल सकती है.

यही वह बिंदु था जहां सवाल बदल गया.पहले सवाल था- रोहित को और कितना खिलाया जाए? अब सवाल है- अगर रोहित इसी तरह की पारियां देते रहे तो उन्हें बाहर कैसे रखा जाए?

2027 की रेस अभी खुली है
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रोहित का 2027 वर्ल्ड कप टिकट पक्का हो गया है. ऐसा मानना जल्दबाजी होगी.

भारत के पास ओपनिंग के लिए कई विकल्प हैं. यशस्वी जायसवाल लंबे समय की योजना का हिस्सा हो सकते हैं. ऋतुराज गायकवाड़ भी ODI टीम में मौजूद हैं. शुभमन गिल पहले ही कप्तान और टीम के केंद्रीय बल्लेबाज बन चुके हैं. BCCI ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI स्क्वॉड में इन विकल्पों को साथ रखा है.

यानी रोहित को किसी विशेषाधिकार के आधार पर जगह नहीं मिलनी है. उन्हें रन बनाने होंगे, फिट रहना होगा और अपनी जगह को लगातार सही साबित करना होगा. लेकिन लॉर्ड्स की 138 ने इतना जरूर किया कि रोहित के लिए दरवाजा फिर से खुला हुआ दिखाई देने लगा.

असली परीक्षा अब शुरू होगी
वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज 27 सितंबर से शुरू होगी और तीनों मुकाबले भारत में खेले जाएंगे. इसके बाद नवंबर में न्यूजीलैंड, दिसंबर में श्रीलंका और जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे के खिलाफ ODI सीरीज भी निर्धारित है. इसका मतलब है कि 2027 वर्ल्ड कप से पहले भारत के पास अपने ODI संयोजन को परखने के लिए कई मौके हैं. रोहित के लिए भी यही असली परीक्षा है.

एक बड़ी पारी ने बहस बदली है, खत्म नहीं की. लॉर्ड्स की 138 ने उन्हें 2027 की टीम में जगह नहीं दिलाई, लेकिन उसने चयनकर्ताओं के लिए एक बात जरूर मुश्किल कर दी- रोहित शर्मा को अभी से भविष्य की तस्वीर से बाहर मान लेना.

क्रिकेट में महान खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कई बार सिर्फ उनके आंकड़े नहीं होते. वह क्षमता होती है कि जब दुनिया आपको कहानी का पुराना किरदार मानने लगे, तब आप एक ऐसी पारी खेल दें जिससे पूरी कहानी फिर लिखनी पड़े.