Tata Sons IPO का रास्ता साफ, एन चंद्रशेखरन को 5 साल के लिए फिर मिली कमान

मुंबई 

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। बता दें कि बीते अगस्त महीने में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला लिया था। बहरहाल, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की खबरों के बीच टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर गुलजार हो गए।

क्यों लिस्टिंग की संभावना ?
टाटा संस बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। दरअसल, बीते सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी हो सकता है।

अपर-लेयर एनबीएफसी है टाटा संस
आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को 'अपर-लेयर' की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।

जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की एसेट दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र नॉन-लिस्टेड कंपनी थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

शेयरधारकों में दो फाड़
टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच भी मतभेद की खबरें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स (गैर-लाभकारी संस्थाओं का समूह जिसके पास टाटा संस की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है) लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है जबकि लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला इसका सबसे बड़ा निजी शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्धता की मांग कर रहा है।

टाटा संस टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी है और उसकी आईटी, ऑटो, स्टील, कंज्यूमर, एयरलाइल, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज समेत अलग-अलग कारोबारों में हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी के फाइनेंस, पूंजी आवंटन और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक सार्वजनिक निगरानी और खुलासे की जरूरत बढ़ सकती है।