चंडीगढ़: पंजाब सरकार के तमाम दावों और सख्त हिदायतों के बावजूद सूबे के खेतों में आग लगाने का सिलसिला शुरू हो गया है। अगली फसल की बिजाई के लिए किसान खेतों को साफ करने के चक्कर में गेहूं के अवशेष जला रहे हैं, जिसका सीधा असर राज्य की हवा की गुणवत्ता (AQI) पर पड़ रहा है।
हवा की गुणवत्ता में गिरावट (AQI अपडेट)
मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है:
मंडी गोबिंदगढ़: यहाँ का एक्यूआई 202 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए 'खराब' श्रेणी में आता है।
बठिंडा: 155 (यलो जोन)
अमृतसर: 135 (यलो जोन)
पटियाला: 106 (यलो जोन)
प्रशासनिक कार्रवाई और निगरानी
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती बढ़ा दी है:
- सैटेलाइट निगरानी: 1 अप्रैल से 30 मई तक खेतों की निगरानी उपग्रहों के जरिए की जा रही है।
- जुर्माना: अब तक 4 मामलों में 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- एफआईआर: एक मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।
- रेड एंट्री: तीन किसानों के भूमि रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है, जिसका अर्थ है कि वे अब अपनी जमीन न तो बेच सकेंगे और न ही उसे गिरवी रख पाएंगे।
क्षेत्रवार दर्ज मामले
अब तक राज्य के विभिन्न जिलों से कुल 44 मामले सामने आए हैं। सोमवार को दर्ज 14 मामलों का जिलावार ब्यौरा इस प्रकार है:
- सबसे अधिक मामले: शहीद भगत सिंह नगर (8) और मुक्तसर (6)।
- अन्य जिले: फिरोजपुर व कपूरथला (5-5), बरनाला, गुरदासपुर व पटियाला (3-3), जालंधर व लुधियाना (2-2)।
- बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का और संगरूर सहित अन्य कुछ जिलों में 1-1 मामला दर्ज हुआ है।
पुराने आंकड़ों से तुलना
राहत की बात यह है कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस समय अवधि में मामलों में कमी आई है:
- 2024: 49 मामले
- 2025: 87 मामले
- 2026 (अब तक): 44 मामले
पंजाब के हॉटस्पॉट जिले (तुलनात्मक डेटा)
पिछले दो वर्षों में इन जिलों में सबसे अधिक आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई थीं:
जिला 2024 (मामले) 2025 (मामले)
अमृतसर 1015 1102
गुरदासपुर 1335 856
फिरोजपुर 919 743
मोगा 788 863
तरनतारन 589 700