छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक कदम: RMA के 18 साल के जमीनी अनुभव को मिली संचालनालय में जगह, ग्रामीण स्वास्थ्य होगा मजबूत

रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार का एक अद्वितीय और दूरदर्शी निर्णय सामने आया है। राज्य के दूरस्थ आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 18 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं का मोर्चा संभाल रहे *Rural Medical Assistant (RMA)* संवर्ग के अनुभवी चिकित्सकों को अब संचालनालय में पदस्थापना दी गई है।

PMHM यानी त्रिवर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम उत्तीर्ण कर रजिस्ट्रीकृत हुए RMA को वर्ष 2008-2009 से राज्य के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ किया गया था। ऐसे कई PHC थे जिनकी चौखट पर आज तक डॉक्टर नहीं पहुंचे, वहां RMA ने अकेले दम पर स्वास्थ्य सेवाओं को जीवित रखा।

जमीनी अनुभव बना प्रशासनिक पूंजी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि RMA के पास छत्तीसगढ़ की ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की जमीनी वास्तविकताओं की गहरी समझ है। सीमित संसाधनों में, कठिन परिस्थितियों में और स्थानीय संस्कृति को समझते हुए उन्होंने जो अनुभव अर्जित किया है, वह राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण बौद्धिक और प्रशासनिक पूंजी है।

इसी दूरदर्शी सोच के तहत *डा. राज सिंह मंडावी, डा. अरविंद भारती एवं डा. मनीष कुमार साहू* जैसे अनुभवी RMA चिकित्सकों की पदस्थापना संचालनालय में की गई है।

नीति निर्माण में मिलेगा जमीनी अनुभव का लाभ

संचालनालय में पदस्थ RMA अब अपने 18 वर्षों के फील्ड अनुभव के आधार पर नीतियों और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे विशेष रूप से6 ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं बन सकेंगी, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

RMA संघ ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि “अनुभव और प्रशासन का यह समन्वय छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और जनहितैषी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।”

स्वास्थ्य विभाग के इस कदम से यह स्पष्ट है कि अब नीति बनाने वालों की टेबल पर उन लोगों की आवाज भी पहुंचेगी, जिन्होंने जमीन पर रहकर स्वास्थ्य सेवाओं को चलाया है।