देवगढ़
आम का असली सीजन आने में अभी कुछ महीने बाकी हैं लेकिन आम के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है. महाराष्ट्र के कोंकण इलाके के मशहूर देवगढ़ हापुस आम की पहली खेप बाजार पहुंचने के लिए तैयार है. खास बात यह है कि इस बार दिवाली के मौके पर भी लोग हापुस आम का स्वाद चख सकेंगे. देवगढ़ के एक किसान ने अपने बाग से आम का पहला डिब्बा वाशी बाजार के लिए भेजा है।
यह आम संकष्टी के शुभ मुहूर्त पर पेड़ों से तोड़े गए थे. इसके बाद इन्हें छांटकर पैक किया गया और बिक्री के लिए भेज दिया गया. शुक्रवार, 30 अक्टूबर को आम का यह पहला डिब्बा वाशी बाजार में उपलब्ध होगा।
संकष्टी के शुभ मुहूर्त पर तोड़े गए आम
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के देवगढ़ तालुका स्थित गिरये रामेश्वर गांव के किसान नीलेश वसंत बांदकर ने अपने बाग से आम की पहली फसल तैयार की है. उन्होंने गुरुवार, 29 अक्टूबर को शुभ मुहूर्त में करीब साढ़े छह डिब्बे आम तोड़े. इन आमों को पैक करके वाशी बाजार भेजा गया है. वहां जनार्दन एंड कंपनी के माध्यम से इनकी बिक्री की जाएगी. आम की पहली खेप बाजार पहुंचने से पहले ही स्थानीय उत्पादकों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई है।
दिवाली पर भी मिलेगा हापुस आम का स्वाद
आमतौर पर देवगढ़ हापुस आम का सीजन बाद में शुरू होता है, लेकिन नीलेश बांदकर ने खास प्रयास करके अक्टूबर में ही आम की फसल तैयार कर ली है. उनकी योजना दिवाली पड़वा तक पांच दर्जन आम की क्षमता वाले छह से सात और डिब्बे वाशी बाजार भेजने की है. इससे दिवाली के दौरान ग्राहकों को भी कोंकण के मशहूर हापुस आम का स्वाद चखने का मौका मिल सकता है. फिलहाल बाजार में भेजे गए पहले डिब्बे की कीमत को लेकर भी आम उत्पादकों और व्यापारियों में उत्सुकता है।
जून में ही आ गए थे पेड़ों पर फूल
नीलेश बांदकर के बाग में कुछ आम के पेड़ों पर जून महीने में ही फूल आ गए थे. उन्होंने इन फूलों को सुरक्षित रखने और फलों को तैयार करने के लिए खास देखभाल की. इसके लिए उन्होंने चार-पांच पौधों की कलमों को प्लास्टिक पेपर से ढककर सुरक्षित रखा. साथ ही, समय-समय पर फूलों और फलों पर पानी का छिड़काव किया. उनकी मेहनत का नतीजा रहा कि अक्टूबर में ही आम की पहली फसल तैयार हो गई।
पिता और भाई का भी मिला सहयोग
नीलेश बांदकर अपने भाई विद्याधर बांदकर के साथ मिलकर आम का कारोबार करते हैं. बाग की देखभाल और फसल तैयार करने में उनके पिता और भाई भी सहयोग करते हैं. नीलेश के मुताबिक, परिवार के सहयोग से ही उन्हें आम की खेती में नए प्रयोग करने और बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिलती है. इससे पहले भी उन्होंने दो साल पहले नवंबर में वाशी बाजार में आम का एक डिब्बा भेजा था. इस बार अक्टूबर में ही पहली खेप भेजकर उन्होंने एक बार फिर नया प्रयोग किया है. अब सभी की नजरें वाशी बाजार में देवगढ़ हापुस के पहले डिब्बे की कीमत और मांग पर टिकी हैं।